नोएडा

MBBS Doctor: सर्जरी में फेल, साइबर ठगी में पास! MBBS डॉक्टर का बड़ा खेल बेनकाब

MBBS Doctor: गलत सर्जरी के बाद आंध्र प्रदेश से भागा था आरोपी डॉक्टर; ग्रेटर नोएडा में छिपकर डेटिंग ऐप्स के जरिए रचता था ठगी का मायाजाल

Reported by India Headlines and edited by Kashish Solanki

MBBS Doctor : ग्रेटर नोएडा की साइबर क्राइम थाना पुलिस ने एक बड़े ठग को गिरफ़्तार कर लिया है। यह ठग एमबीबीएस और एमडी डॉक्टर है, लेकिन  काम उसका लोगों को ठगना था। यह सोशल मीडिया और डेटिंग ऐप्स पर नकली महिला प्रोफाइल बनाकर और महिलाओं की आवाज में बात करके लोगों को निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाता था।

हाई-प्रोफाइल, शर्मनाक करतूत

पकड़े गए आरोपी की पहचान 37 वर्षीय रामाकृष्ण पेदगावेगी के रूप में हुई है, जो मूल रूप से आंध्र प्रदेश का रहने वाला है। रामाकृष्ण एक योग्य डॉक्टर है, जिसने एमबीबीएस और एमडी की डिग्री हासिल की है। वह पहले आंध्र प्रदेश के एक निजी अस्पताल में प्रैक्टिस करता था, लेकिन एक गलत सर्जरी के कारण उसके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज हो गई थी। पुलिस के डर से वह वहां से भाग गया और ग्रेटर नोएडा के चाई-फाई सेक्टर में एक किराए का कमरा लेकर छिप गया।

डेटिंग ऐप पर महिला बनकर ठगी

​डीसीपी साइबर शैव्या गोयल और थाना प्रभारी विजय सिंह राणा के मुताबिक, आरोपी ने खुद को पुलिस से बचाने और पैसे कमाने के लिए साइबर ठगी का रास्ता अपनाया। वह सोशल मीडिया और डेटिंग ऐप्स पर महिलाओं के नाम और तस्वीरों का इस्तेमाल कर नकली आईडी बनाता था।

ठगी का तरीका था शातिर

वह अपनी अच्छी अंग्रेजी बोलकर मुख्य रूप से उच्च आय वर्ग के लोगों को अपना निशाना बनाता था। वह खुद को एक प्रसिद्ध कंपनी का वित्तीय सलाहकार बताकर लोगों का विश्वास जीतता था और महिलाओं की आवाज में बात करके पीड़ितों को अपने जाल में फंसाता था। जब कोई व्यक्ति पूरी तरह से उसकी बातों पर यकीन कर लेता था, तो वह उन्हें एक नकली निवेश प्लेटफॉर्म पर निवेश करने के लिए कहता था, जिसमें उन्हें कई गुना मुनाफा कमाने का लालच देता था।

इंजीनियर की शिकायत पर कार्रवाई

​इस ठग का खुलासा तब हुआ जब इसने बेंगलुरु के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर से बहुत सारे पैसे ठग लिए। पीड़ित की शिकायत के बाद नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की मदद से साइबर टीम ने जाल बिछाकर रामाकृष्ण को ग्रेटर नोएडा से पकड़ लिया।

जांच में यह बात सामने आई है कि जिन पीड़ितों से पैसे लिए गए थे, उन्हें एक विशेष बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहा जाता था। यह खाता वास्तव में एक फर्जी खाता था, जो किसी और के नाम पर खोला गया था। लेकिन इसमें दिलचस्प बात यह है कि इस खाते की इंटरनेट बैंकिंग सुविधा आरोपी डॉक्टर के मोबाइल नंबर से जुड़ी हुई थी।

फिलहाल, पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह ठगी का नेटवर्क कितना बड़ा है और अब तक कितने पैसे ठगे गए हैं।

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